Skc-mcm/1A/11. 00 The House met at eleven of the clock, mr. Chairman in the Chair mr. Chairman



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Uncorrected/Not for Publication - 14-08-2013

SKC-MCM/1A/11.00
The House met at eleven of the clock,

MR. CHAIRMAN in the Chair.

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MR. CHAIRMAN: Question 121. ...(Interruptions)...

RE. RESOLUTION PASSED BY PAKISTAN ASSEMBLY ACCUSING INDIAN TROOPS OF UNPROVOKED AGGRESSION ON LoC
श्री रवि शंकर प्रसाद (बिहार) : सर, एक बहुत गंभीर विषय को उठाना है। पाकिस्तान की संसद ने एक प्रस्ताव पारित किया है जिस प्रस्ताव में सर्वानुमति से भारत को लाइन ऑफ कंट्रोल पर एग्रेसर बताया गया है, भारत को कंडेम किया गया है और कहा गया है कि पाकिस्तान कश्मीर को और वहां पर सेल्फ-डिटर्मिनेशन को सारा पॉलिटिकल, डिप्लोमेटिक और मॉरल सपोर्ट देता रहेगा। एक तरफ हम बातचीत की बात करते हैं और वहां की संसद भारत के खिलाफ इस तरह का प्रस्ताव पारित करती है। यह गंभीर विषय है। मैं सरकार से चाहूंगा कि सर्वानुमति से एक प्रस्ताव आना चाहिए, ताकि अपनी सेना का, अपने सुरक्षाकर्मियों का मनोबल बढ़ा रहे, यह हम आपसे विनम्र प्रार्थना करना चाहते हैं। यह हम अवश्य कहना चाहते हैं।

संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री राजीव शुक्ल) : माननीय सदस्य ने जिस प्रस्ताव के बारे में मामला उठाया है, तो जब इस तरह की बातें होती हैं और अगर इस तरह की कोई गतिविधि पाकिस्तान की तरफ से होती है तो उसमें पूरा सदन एकमत होता है, उसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष का सवाल नहीं होता, सारे दल एक साथ होते हैं। विदेश मंत्री जी से हमारी बात हुई है और इस मामले में जल्दी ही एक प्रस्ताव तैयार हो रहा है। उम्मीद है कि वह प्रस्ताव सर्वानुमति से सदन द्वारा पारित किया जाएगा। उस प्रस्ताव पर जैसे ही काम पूरा हो जाता है, हम आपको अवगत कराएंगे।

(समाप्त)



RE. EXPRESSION USED BY HON. CHAIRMAN ON 13TH AUGUST, 2013
SHRI DEREK O’BRIEN: Sir, yesterday...(Interruptions)...

MR. CHAIRMAN: Just one minute, please. ...(Interruptions)...

SHRI DEREK O’BRIEN: Let me humbly submit, Sir, that we have all the highest regard for the Chair.

DR. NAJMA A. HEPTULLA: Sir, I want to say the same thing...(Interruptions)...

MR. CHAIRMAN: Please, please....(Interruptions)...

SHRI DEREK O’BRIEN: But, Sir, the phrase ‘federation of anarchists’ has caused us deep hurt. ...(Interruptions)...

MR. CHAIRMAN: Can we discuss it separately? Let us...(Interruptions)...

SHRI NARESH AGRAWAL: It may be parliamentarian...(Interruptions)...

डा0 नजमा ए0 हेपतुल्ला : चेयरमैन साहब, कोई भी चीज......(व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: Could you please allow the Question Hour to run?

DR. NAJMA A. HEPTULLA: Sir, I would allow the Question Hour to run; it is entirely up to you. The point is, I think, डा0 कर्ण सिंह मुझसे ज्यादा सीनियर हैं। मुझे इसी हाऊस में 31 साल हो गए हैं और जिस कुर्सी पर आप बैठे हैं चेयरमैन की तरह से, मैं भी कुछ दिन वहां बैठी हूं। कोई भी अनपार्लियामेंट्री वर्ड अगर चेयर से या हाउस में बोला जाए तो वह ऑटोमेटिकली ही एक्सपंज हो जाता है। सर, आपकी गरिमा कम नहीं होगी बढ़ जाएगी, अगर आप अपनी खुशी से उसको रिकार्ड पर से निकाल दें। यह अनपार्लियामेंट्री वर्ड रिकार्ड पर नहीं जाना चाहिए even in a negative way. आपकी इज्जत बढ़ेगी घटेगी नहीं। मेरी आपसे यह गुजारिश है, रिक्वैस्ट है कि आप खुद अपना बड़प्पन दिखाकर उसको विद्ड्रॉ कर लीजिए। सब लोग आपका ताली बजाकर वैलकम करेंगे।

श्री रामविलास पासवान : सर, हम लोगों को भी अपनी गरिमा का ध्यान रखना चाहिए, यह भी होना चाहिए।......(व्यवधान)

डा0 अनिल कुमार साहनी : सर, एक मिनट हमारी बात सुन लीजिए।......(व्यवधान)

श्री सभापति : यह आप क्या कर रहे हैं। नहीं-नहीं, आप अपनी बात कहिए......(व्यवधान)

डा0 अनिल कुमार साहनी : सुप्रीम कोर्ट ने ओ0बी0सी0 और अनुसूचित जाति और जनजाति का जो आरक्षण खत्म किया है......(व्यवधान)

श्री सभापति : आप पहले बैनर को नीचे रखिए......(व्यवधान)

डा0 अनिल कुमार साहनी : ये उस पर क्या विचार कर रहे हैं? उसको पूरा बहाल करिए।......(व्यवधान)

श्री सभापति : नहीं-नहीं, पहले आप उसको रखिए। आप हाउस में बैनर नहीं दिखा सकते, पोस्टर नहीं दिखा सकते।......(व्यवधान)

डा0 अनिल कुमार साहनी : महोदय,......(व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: Can I have a say now?

डा0 नजमा ए0 हेपतुल्ला : सर आपने इसका जवाब नहीं दिया।

DR. V. MAITREYAN: You have the final say, Sir.

MR. CHAIRMAN: I am seeking the permission of the House to have a say.

The word objected to is “anarchist”. Now, let me quote what the Chair said– and I think it is available in the transcript – “Every rule in the Rule Book, every single etiquette, is being violated in the House. We are legislators. If the hon. Members wish to become a federation of anarchists, then it is a different matter, because there is no order in the House.”

(CONTD. BY HK/1B)

-SKC/HK-HMS/1b/11.05

MR. CHAIRMAN (CONTD.): I used the expression 'federation of anarchists' because this is a proper name. There are several bodies with this name which exist in different countries. There is also an international association which goes by this name. Its principles of work, broadly speaking, are two-fold: one is abolition of all forms of authority, the other is commitment to direct action, anti-parliamentarian, etc., etc. So, if you read what I had said, I said with the conditional clause 'if'. As such, it is not an allegation or an attribute ascribed to the House. It is a question which is posed. I leave it to your judgment. If a question is posed, it cannot be an allegation.

DR. V. MAITREYAN: What is said and what it conveys is totally different. ...(Interruptions)...

श्री नरेश अग्रवाल (उत्तर प्रदेश) : सर, थ्री ईडियट नाम से एक पिक्चर बनी है। अब कह दिया जाए कि थ्री ईडियट फिल्म हिंदुस्तान में बनी थी, तो क्या थ्री ईडियट को हम पार्लियामेंटरी कह देंगे क्योंकि उस पर पिक्चर बनी थी? अब अगर, उस फिल्म को क्वोट कर के कह दिया जाए, तो क्या वह पार्लियामेंटरी होगी और सदन उसे स्वीकार कर लेगा?

(समाप्त)



THE LEADER OF THE OPPOSITION (SHRI ARUN JAITLEY): Sir, the sentiment of the House has been conveyed to you, as all Members have spoken in one voice. Both, personally we have the highest regards for you and also for the dignity of the Chair that you occupy. There are several precedents in this House where things are said in the heat of the moment and then when the heat gradually fades away, we make sure that that expressions are also not left. Now, this could have been posed as a question, but even when some averments are posed as a question, there is a well-known concept of innuendo -- you directly don't say something but you say it by implication and it has the same impact. That is how it has been understood. Now, 'anarchy' is something where there is a complete chaos and there is an absence of governance, etc. Now, in this House emotions are expressed, opinions are expressed on several issues and yet we allow, after expressing them, the House to proceed. Now this very Session is an evidence of that. We have sat till 7.00 or 8.00 in the evening and already passed four legislations -- three yesterday and one earlier. We discussed, at least, four or five issues of public importance. We also expressed our opinions in a manner which, probably, has anguished you. Several legislative bodies, not only in this country but also outside this country, held the word 'anarchist', to be unparliamentary. The New Zealand Parliament held it to be unparliamentary; the Tamil Nadu Assembly held it to be unparliamentary. Please don't allow it as a description of the House to be on record of the proceedings of this House. It won't be a good precedent. So, I urge you and leave it to your good sense. The Chair's remarks are never expunged; we only urge you. While the record is corrected, you may consider correcting that expression.

(Ends)


श्री के0सी0 त्यागी (बिहार) : सर, मैं सीताराम येचुरी जी और कॉमरेड राजा को इसमें शामिल करके कहना चाहता हूं कि anarchism is a political phenomenon. सोसायटी की जितनी एक्सेप्टेड नॉर्म्स हैं, उनको अपोज करना अनार्किज्म है। जब पूरे यूरोप में मार्क्सवाद का प्रचार-प्रसार चल रहा था, तो उसके खिलाफ इंस्ट्रूमेंट के रूप में एक पॉलिटिकल फिलॉसफी थी। सभ्य समाज के मुकाबले में वह फिलॉसफी थोड़ी चली, इसे यूरोप के एक बड़े बुद्धिजीवी बाकुनिन ने चलाया था। तो सर मैं नहीं मानता और मैं सीताराम येचुरी और कॉमरेड राजा को इसमें गवाह बनाऊंगा क्योंकि ये भी मार्क्सिस्ट स्कॉलर्स हैं, कि अनार्किज्म नान-पार्लियामेंटेरी है। यैस, कई लोगों ने बड़े रुतबे और जलवे के साथ कहा है जिनमें डा0 लोहिया ने कई मौकों पर कहा है, इसके लिए मैं राम गोपाल यादव जी को गवाह बनाऊंगा कि they are anarchists. They oppose all the accepted norms of the society. समाज के जितने भी स्थापित मूल्य हैं, वे सब बुर्जुआ हैं, रिएक्शनरी हैं, वे लोग ऐसा मानते थे।

इसलिए सर, इस "अनार्किस्ट" शब्द पर एक व्यापक बहस होनी चाहिए कि यह शब्द पार्लियामेंटरी है या अन-पार्लियामेंटरी है?



(समाप्त)

DR. V. MAITREYAN: Sir, the expression is unparliamentary. After you said it, the House sat and passed three Bills. ...(Interruptions)...

MR. CHAIRMAN: Dr. Maitreyan, allow others to speak. ...(Interruptions)... (Followed by HK/1c)

HK-KLG/1C/11.10

श्री मोहम्मद अदीब (उत्तर प्रदेश): चेयरमैन साहब, मैं सिर्फ एक बात कहना चाहता हूँ। हम लोग बैक-बेंचर्स हैं और आपने जो कल आइना दिखाया, हमें विश्वास है कि हमने इस हाउस का मजाक बना रखा है। हकीकत यह है कि हम लोग जो पीछे बैठते हैं, देखते हैं कि चंद लोग हैं, जो कि हाउस की बिजनेस चलने नहीं देते। बड़ी मुश्किलों से हम क्वेश्चन ऑवर के लिए क्वेश्चन्स बनाते हैं और बड़ी मुश्किल से हमारे सवाल आते हैं, मगर क्वेश्चन ऑवर होता नहीं है। यह किस तरह की गुफ्तगू हो रही है कि साहब, आप अपने जुमले को वापिस लें। कोशिश तो यह की होती कि हम अपने गिरेहबान में मुंह डालते कि हमने इस पार्लियामेंट का हश्र क्या किया है, हमने इस पार्लियामेंट को कहां ले जाकर खड़ा कर दिया है? इसके ऊपर बहस होने के बजाय इस जुमले पर कहा जा रहा है कि यह अनार्किज्म सही था या गलत था। मुझे अफसोस के साथ कहना पड़ता है कि अपने सब साथियों के साथ आप पार्टी को लीड करते हैं, आपका जब मकसद हो आप कीजिए, लेकिन हम जो छोटे-छोटे लोग यहां बैठे हुए हैं, हम कुछ बिजनेस के लिए आते हैं, कुछ बताना चाहते हैं, कुछ कंट्रीब्यूट करना चाहते हैं। ..(व्यवधान)... हम समझते हैं कि आपने जो कुछ कहा, सही कहा है। (समाप्त)

جناب محمد ادیب (اتّر پردیش) : چیئرمین صاحب، میں صرف ایک بات کہنا چاہتا ہوں۔ ہم لوگ بیک-بینچرس ہیں اور آپ نے جو کل آئینہ دکھایا، ہمیں وشواس ہے کہ ہم نے اس ہاؤس کا مذاق بنا رکھا ہے۔ حقیقت یہ ہے کہ ہم لوگ جو پیچھے بیٹھتے ہیں، دیکھتے ہیں کہ چند لوگ ہیں، جو کہ ہاؤس کا بزنس چلنے نہیں دیتے۔ بڑی مشکلوں سے سے ہم کوئشچن آوور کے لئے کوئشچنس بناتے ہیں اور بڑی مشکل سے ہمارے سوال آتے ہیں، مگر کوئشچن آوور ہوتا نہیں ہے۔ یہ کس طرح کی گفتگو ہو رہی ہے کہ صاحب، آپ اپنے جملے کو واپس لیں۔ کوشش تو یہ کی ہوتی کہ ہم اپنے گريبان میں منھہ ڈالتے کہ ہم نے اس پارلیمینٹ کا کیا حشر کیا ہے، ہم نے اس پارلیمینٹ کو کہاں لے جا کر کھڑا کر دیا ہے؟ اس کے اوپر بحث ہونے کے بجائے اس جملے پر کہا جا رہا ہے کہ انارکزم صحیح تھا یا غلط تھا؟ مجھے افسوس کے ساتھہ کہنا پڑتا ہے کہ اپنے سب ساتھیوں کے ساتھہ آپ پارٹی کو لیڈ کرتے ہیں، آپ کا جب مقصد ہو آپ کیجئے، لیکن ہم لوگ جو چھوٹے چھوٹے لوگ یہاں بیٹھے ہوئے ہیں، ہم کچھہ بزنس کے لئے آتے ہیں، کچھہ بتانا چاہتے ہیں، کچھہ کنٹریبیوٹ کرنا چاہتے ہیں ۔۔۔(مداخلت)۔۔۔ ہم سمجھتے ہیں کہ آّپ نے جو کچھہ کہا، صحیح کہا ہے۔

(ختم شد)



DR. YOGENDRA P. TRIVEDI (MAHARASHTRA): Sir, we need not go to the dictionary meaning; we need not go to the historical meaning; we need not go to the etymological meaning. You must look at the popular feeling. Popular feeling is that 'anarchist' is one who does not believe in the established law and order situation. And this is an expression which is rather a little sour. So, I would submit that let us substitute it by something like 'unruliness' which is an acceptable meaning. The popular meaning of 'anarchist' is not a very healthy one. So, I think we can substitute it by something which is more palatable and which also expresses the feeling of the Chair.

(Ends)


SHRI SITARAM YECHURY (WEST BENGAL): Since Mr. Tygai has invoked Bakunin, Yechuri and Raja, I would like to tell the historical perspective how anarchism as a political phenomenon evolved. ...(Interruptions)... But the point at issue, Sir, is that you please consider whether the House has not been able to reach to the levels of your expression. The reason why I am saying this is because there was an expression in Sociology, I remember, in our student days, which said, "There is an epistemological break on the ontological plane." Now the point is, it is not a question of definition of 'anarchy' or 'anarchism', we are victims of it. Even today, there is a widespread movement in Europe which is called the 'Anarchist', and they are led by anarchists who don't believe in any law and order. Unfortunately, I was not present here the day when you said this; so, I don't understand how the House took that to mean. But from what you read out, you posed it as a question saying that if you are not following the rules, then are you going to lead up to this? If that is your poser, that is perfectly valid. But the way the House has taken it, that may need consideration, and I leave it to your wisdom.

(Ends)


SHRI D. RAJA (TAMIL NADU): Sir, I do agree 'anarchism' is a political trend. It is there for long in the history. But whatever we say, the context is more important. That context creates problems in the House. This is my first point. The second point is regarding parliamentary words or unparliamentary words. I did go through that dictionary once because I used two words in this House and they were considered to be unparliamentary. Once I used the word 'genocide', immediately it was expunged. Then I continued to use that word 'genocide'; several Members used that word 'genocide', it is there on the record now. Again, secondly, once I said, "Discussion should not become a farce". The Chair said, 'farce' is an unparliamentary word. Then I consulted the book; I also consulted Mr. Ravi Shankar Prasad. It says subject to what else is discussed, if it is adjournment motion, then 'farce' becomes unparliamentary.

(Contd. by PB/1d)

PB-MP/1d/11.15

SHRI D. RAJA (CONTD.): Otherwise, ‘farce’ can be used. So, I think, the time has come when we will have to review that ‘word’ book which contains ‘parliamentary’ words and ‘unparliamentary’ words. The time has come that when we are now evolving as a democracy and we are evolving as a Republic, accordingly, we will have to evolve the Rule Books also. So, we leave it to you. It is the context which has created the problem in the House. That’s all.

(Ends)


MR. CHAIRMAN: Thank you. Dr. Karan Singh.

DR. KARAN SINGH (NCT OF DELHI): Sir, I would simply like to say that as Chairman of the Ethics Committee for eight years -- and Sitaramji was a Member of that-- we laid down – Maitreyanji, can I have your attention? – a certain code of conduct, and the very first code of conduct is that nothing should be done that brings down the prestige of the Parliament. I am very sorry to say, Sir, that the way things have developed, the reverse is true. And, I can understand your anguish when day-after-day-after-day, the Question Hour is negated, the debates are negated; two or three people can stand up in the Well of the House and disrupt the whole proceedings! Sir, whether we call it a movement towards ‘anarchism’, ......(Interruptions)... Just a minute.

DR. V. MAITREYAN: Sir, I want to speak something after him. ...(Interruptions)...

MR. CHAIRMAN: Please. Please. ...(Interruptions)... Please. ...(Interruptions)... Dr. Maitreyan, a Member is speaking. ...(Interruptions)...

DR. V. MAITREYAN: Sir, mentioning ‘two-three’ is wrong. We also represent crores of people. ...(Interruptions).. Don’t mention ‘a few people.’ ...(Interruptions)...

MR. CHAIRMAN: Dr. Maitreyan, please. ...(Interruptions)... प्लीज़ बैठ जाइए ...(व्यवधान)... बैठ जाइए। ...(व्यवधान)...

DR. KARAN SINGH: Sir, I don’t mention any particular number of people. ...(Interruptions)...

MR. CHAIRMAN: Please. ...(Interruptions)..

DR. V. MAITREYAN: We also represent crores of people. ...(Interruptions)..

MR. CHAIRMAN: I am afraid, somebody might get a mistaken impression about... ...(Interruptions)... Dr. Saheb, please. ...(Interruptions)... No, no; please sit down. ...(Interruptions)... Please sit down. ...(Interruptions)... Yes, Dr. Saheb. ...(Interruptions)...

DR. KARAN SINGH: Sir, obviously, everybody here represents large numbers of people. I am not blaming any person. What I am trying to say is that your anguish is understandable and that anguish is shared by many of us because we come here every day in order to listen to the ...(Interruptions)...

DR. V. MAITREYAN: Who will understand the anguish of the people of the South? ...(Interruptions)...

DR. KARAN SINGH: We will understand. I will understand the anguish of the people of the South. ...(Interruptions)...

MR. CHAIRMAN: Dr. Karan Singh, please go ahead. ...(Interruptions)...

DR. KARAN SINGH: So, Sir, what I am saying is that we have to really look into ourselves and see what it is that we are doing. We are on television everyday. All over, wherever I go, people say, भई, आपकी संसद में क्या हो रहा है? So, whatever the provocation is, my submission is that we must follow certain codes of conduct, certain rules. I have been in the Parliament for thirty-six years. I have seen some of the greatest Opposition leaders like Nath Pai, Hiren Mukherjee, Indrajit Gupta, etc. Look at the way they used to drag the Government across the coals. But disrupting the House is not the way -- I am sorry to say it. But parliamentary disruptions ... ...(Interruptions)...

DR. V. MAITREYAN: The Government also that day was different, Sir. ...(Interruptions)...

MR. CHAIRMAN: Please. ...(Interruptions)... Please don’t wear those caps. They can give a very misleading impression. ...(Interruptions)... Silence, please. ...(Interruptions)...

DR. KARAN SINGH: Sir, I am not talking here what is ... ...(Interruptions)... I want to make the point. Your anguish is understandable and the Hindi translation of the ‘anarchist’ would be “अव्यवस्था”। अगर “अव्यवस्था” शब्द का प्रयोग किया जाए, तो इतना बुरा नहीं लगेगा। ...(व्यवधान)...

(Ends)


MR. CHAIRMAN: Silence, please. ...(Interruptions)... Sorry, Dr. Saheb, I didn’t get it. ...(Interruptions)...

श्री के.सी. त्यागी : यह अव्यवस्था नहीं, अराजकता है। ...(व्यवधान)...

MR. CHAIRMAN: Yes, Mr. Rapolu.

SHRI ANANDA BHASKAR RAPOLU: Respected Chairman, ... ...(Interruptions)...

MR. CHAIRMAN: Others also want to speak. What can I do? ...(Interruptions)... What can I do? ...(Interruptions)... If I allow people to speak, you find fault. If I don’t allow, ... ...(Interruptions)... What am I to do? ...(Interruptions)...

श्री भगत सिंह कोश्यारी : सर, मैं आपसे एक बात पूछना चाहता हूं। ...(व्यवधान)...

श्री सभापति : कोश्यारी जी, बोलिए। ...(व्यवधान)...

श्री भगत सिंह कोश्यारी (उत्तराखंड) : सर, हमारे नेता के बोलने के बाद मुझे बोलने की जरूरत नहीं थी, लेकिन मेरा आपसे निवेदन यह है कि जिस शब्द का प्रयोग आपने किया है, हो सकता है कि चूंकि सब anarchists’ हैं, तो मैं भी anarchist’ हूं और बाकी भी anarchists’ हैं, तो इससे देश और विदेश में जो मैसेज जाएगा, मेरी जो छोटी समझ है, मैं शब्दों के ...(व्यवधान)... आप ही हल्ला करते हैं। ...(व्यवधान)...

श्री सभापति : आप लोग बैठ जाइए...(व्यवधान)... बैठ जाइए। ...(व्यवधान)... कोश्यारी जी, आप बोलिए। ...(व्यवधान)... आप बोलिए। ...(व्यवधान)...



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