SK/1A/11. 00 The House met at eleven of the clock, mr. Chairman in the Chair. OBITUARY REFERENCE mr. Chairman


THE VICE-CHAIRMAN (DR. E. M. SUDARSANA NATCHIAPPAN)



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THE VICE-CHAIRMAN (DR. E. M. SUDARSANA NATCHIAPPAN): Please conclude. Kindly cooperate. We have to cooperate.

डा. प्रभा ठाकुर : उपसभाध्यक्ष जी, मैं अपनी समय सीमा में ही बोलूंगी, माया जी से कम समय ही लूंगी। आपने उधर समय दिया है। मैं पूरा कोऑपरेट कर रही हूं। मैं जानती हूं कि कोऑपरेशन हम लोगों से ही मांगा जाता है।

इसमें कई बातें हैं जैसे घूरना, पीछा करना, दूसरी बार पीछा करने पर दंड देना, ये बातें मेरी समझ में नहीं आईं, क्योंकि यहां रेप के मामलों में तो सज़ा होती नहीं है, फिर इन मामलों में हो सकता है कि कई लोगों को सिर्फ परेशान किया जाए। हां, यदि किसी लड़की का कोई निरंतर पीछा करता है, दो बार, चार बार, पांच बार कोई लगातार पीछा कर रहा है, तो अवश्य ही उसकी नीयत खराब है और कल को हो सकता है कि वह हताशा में उस लड़की को मार डाले। इसलिए वहां यह गंभीरता होनी जरूरी है।



इसके अलावा अगर पुलिस किसी थाने में एफ.आई.आर. दर्ज़ नहीं करती है, वैसे गृह मंत्री जी ने स्पष्ट बताया है कि यह जरूरी होगा और उन्होंने जोर दिया है कि एफ.आई.आर. दर्ज़ हो। जहां भी ऐसा न हो, वहां कुछ ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि वहां के सत्र न्यायालय में या एस.डी.एम. कोर्ट में या कलक्टर कोर्ट में एफ.आई.आर. दर्ज़ कराने की मांग वह पीड़िता कर सके। आवश्यकता पड़ने पर उन पीड़िताओं के लिए नि:शुल्क वकील भी उपलब्ध होने चाहिए। वैसे सरकार ने एक प्रश्न के जवाब में मुझे बताया भी है कि हर जगह पीड़िताओं को जरूरत पड़ने पर वकील उपलब्ध कराए जाते हैं।

उपसभाध्यक्ष जी, जहां तक पहनावे का सवाल है, छोटी बच्चियों का ऐसा क्या पहनावा होगा कि रेप की नौबत आए? असल में लोगों के दिमाग में ही गंदगी है, ये परवर्टेड माइंड्ज़ हैं, जब तक ऐसे लोगों को मृत्यु दंड नहीं मिलेगा, तब तक यह समस्या नहीं सुलझेगी। यदि इस विधेयक के पास होने के बाद इस तरह की वारदातें रुक जाती हैं, तो देश की जनता मानेगी कि यह विधेयक कामयाब रहा, प्रभावी रहा, लेकिन अगर उसके बाद भी ऐसी वारदातें नहीं रुकती हैं, इसका मतलब यह होगा कि जो एक परसेंट औरतें ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट करती हैं, वे भी रिपोर्ट करने नहीं जाएंगी, क्योंकि उन्हें लगेगा कि न्याय तो मिलता नहीं, ऊपर से बदनामी मिलती है, तो वे क्यों जाएंगी? बाकी औरतें तो बदनामी के डर से रिपोर्ट करने नहीं जातीं, उनकी हिम्मत ही नहीं होती है। अगर उन्हें न्याय मिलेगा, तो ज्यादा महिलाएं जाएंगी और वे जाकर न्याय के लिए गुहार लगाएंगी। जब ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को न्याय मिलेगा, जब ऐसे अपराधियों को फांसी की सज़ा होगी, तो इससे लोगों में खौफ होगा कि नहीं, हमें मृत्यु दंड मिलेगा।
(1U/MP पर जारी)

NBR-MP/1U/1.30

(THE VICE-CHAIRMAN (SHRIMATI RENUKA CHOWDHURY) IN THE CHAIR)
डा. प्रभा ठाकुर (क्रमागत) : जब दो-चार अपराधियों को फांसी हो जाएगी, उसके बाद आप देखिएगा कि कैसे इस तरह के अपराध कम होते हैं? क्या मिडल ईस्ट में, रशिया में, चाइना में मर्द नहीं हैं, औरतें नहीं हैं? लेकिन वहां का रेश्यो देख लीजिए कि इतना कम क्यों है? इस तरह के निमर्म बलात्कार पर, जिसको मैं हत्या से भी बढ़कर मानती हूं, वहां मृत्यु दंड का प्रावधान है, इसलिए वहां इस तरह की वारदातें कितनी होती हैं, यह आप पता कर लीजिए। उस व्यवस्था की यहां आज नहीं, तो कल ज़रूरत पड़ेगी, इसलिए मेरा अनुरोध है कि इस पर भी ध्यान दें।

महोदया, मैं अहिल्याबाई के न्याय की याद दिलाना चाहती हूं। बलात्कार के मामले में महारानी अहिल्याबाई ने अपने बेटे को हाथी तले रौंदवाकर न्याय


दिलाया था। जहांगीर का न्याय भी सुप्रसिद्ध है - वहीं दूध का दूध और पानी का पानी। और क्यों न हो? कोई महिला कैसी है, अगर पुलिस पूरी ईमानदारी से मोहल्ले में उसके बारे में मालूम कर ले, तो उसे जानकारी हो जाएगी। कॉलेज, स्कूल में मालूम करे, तो पता चल जाएगा कि यह लड़की किस तरह की है? कार्यस्थल में जाएं, तो वहां प्रॉब्लम, प्रमोशन में प्रॉब्लम, नौकरियों में प्रॉब्लम, सब जगह प्रॉब्लम। वे कहां-कहां भुगतान करें? नौकरियों में भी छिपे हुए बलात्कार हैं, तो इनको रोकने के लिए सरकार महिलाओं को सरकारी नौकरियों में आरक्षण दे। अगर सरकार 33 फीसदी आरक्षण दे, तो वे महिलाएं कई जगह मजबूर नहीं होंगी। इसी तरह प्रमोशन में भी कोई ऐसी पारदर्शी स्थिति और इस तरह के आरक्षण की व्यवस्था होगी, तो अच्छा होगा। अगर हम अपनी बहन-बेटियों को ऐसी स्थितियों से बचाना चाहते हैं, तो उसके लिए और दो कदम बढ़ाकर, विधेयक में और भी संशोधन लाकर उनको नौकरियों में, प्रमोशन में 33 फीसदी आरक्षण दें। आज हमारी बच्चियां खूब पढ़ रही हैं और हर घर में बच्चियां नौकरी करना चाहती हैं, लेकिन सब इज्ज़त से जीना भी चाहती हैं। वे कहीं मजबूर न हों, इसके लिए आज हर क्षेत्र में औरतें अपने आपको प्रमाणित कर रही हैं और उनको मौका मिलना चाहिए।

महोदया, यह सरकार एक संवेदनशील सरकार है। हमारे प्रधान मंत्री जी और हमारी यू.पी.. की अध्यक्षा महिलाओं के प्रति विशेष संवेदनशील हैं। हमारे यहां, हम कांग्रेस के लोगों को यह निर्देश नहीं है कि अगर दिल्ली में रेप हो, तो उसके बारे में हम न बोलें। हम उस पर भी बोलते हैं, आवाज़ उठाते हैं, लेकिन जब मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कहीं रेप की बात हो और उस इशू को अगर मैं यहां उठाती हूं, तो हमारे बी.जे.पी. के साथी उसके विरोध में खड़े हो जाते हैं, बोलने नहीं देते हैं। लेकिन कांग्रेस में, जो हमारी अध्यक्षा हैं, उनकी तरफ से ऐसी कोई बात नहीं कही जाती है कि हमें ऐसी बातों को छिपाना है। हमें यह निर्देश है कि बलात्कार तो बलात्कार है, चाहे वह किसी भी राज्य में हो, हमें उसे छिपाना नहीं है, हमें उसके खिलाफ आवाज़ उठानी है। मैं अपने साथियों से भी कहूंगी कि कम से कम बलात्कार जैसे संगीन मामलों में, चाहे वह किसी भी प्रदेश में हों, चाहे वहां आपकी सरकार हो या न हो, हम सबको एक स्वर से मांग उठानी चाहिए और इस मामले में राजनीति नहीं होनी चाहिए।

महोदया, मैं अंत में सरकार को धन्यवाद देते हुए कहना चाहती हूं कि बहुत लोग समझते हैं कि औरतें बड़ी कमज़ोर होती हैं, जबकि एक तरफ नारी को “शक्ति” कहा जाता है। जयशंकर प्रसाद ने तो कहा था “नारी तुम केवल श्रद्धा हो।” फिर मनुस्मृति में कहा गया “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:।” बहुत विशेषण दे दिए, लेकिन जब नारियों को न्याय देने की बात होती है, उनको अधिकार देने की बात होती है, तो कई बार कई तरह के मज़ाक होने लगते हैं। नारी को अर्द्धांगिनी कहते हैं, लेकिन देखा जाए तो कई घरों में उसकी स्थिति क्या रहती है? जब चाहे घर तेरा, जब चाहे तब तेरा घर नहीं, तू घर से बाहर जा, इस तरह की हालत है, मगर यहां पर मैं यह कहना चाहती हूं –

कागज़ की किश्तियां भी बहुत काम आएंगी,

जिस दिन तुम्हारे शहर में सैलाब आएगा।”



तो ये महिलाएं ही हैं, जो समाज को संभाले हुए हैं, समाज के संतुलन को संभाले हुए हैं, अपने बच्चों के, युवा-पीढ़ी के चरित्र को संभाले हुए हैं और नैतिकता को संभाले हुए हैं। आज उनकी रक्षा करना, उनके अधिकारों की रक्षा करना और उनको न्याय देना हर सरकार का पहला धर्म है। इसलिए इसको टाइमबाउंड बनाया जाए और इसमें यह गुंजाइश न रहे कि पांच साल से बीस साल, बीस साल या मृत्यु दंड भी, तो गुंजाइश न रहे। एक कहावत है कि कानून में अगर सुई बराबर भी छेद रह जाए, तो उसमें से हाथी निकल सकता है।

(1W/SC-KS पर जारी)

sc-ks/1.35/1w

डा0 प्रभा ठाकुर (क्रमागत) : इसलिए वह सुई बराबर छेद न रहे, मेरी आपसे यही अपील है, ताकि कोई ऐसा अपराधी बचकर निकल न सके। धन्यवाद।

(समाप्त)



THE VICE-CHAIRMAN (SHRIMATI RENUKA CHOWDHURY): Now, before I call the next speaker, I have a request to make. There are a lot of hon. Members who want to speak. All of us are passionate about this subject. It would be very nice if all of us can be generous towards each other and ensure that we give the opportunity to all those who want to speak on this subject. स्पीकर्स कृपया संक्षेप में बोलें और फोकस्ड ढंग से बोलें ताकि it is a meaningful debate. हम कोशिश कर रहे हैं कि we have a brisk pace and we have a very fruitful debate on this subject.

The next speaker is Satish Chandra Misraji.



श्री सतीश चन्द्र मिश्रा (उत्तर प्रदेश) : धन्यवाद उपसभाध्यक्ष महोदया, मैं सबसे पहले आपको और अपनी पार्टी की नेता बहन मायावती जी को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने मुझे इस गंभीर विषय पर बोलने का और इस बिल पर अपनी बात रखने का मौका दिया। महोदया, शुरू में ही मैं यह कहना चाहता हूं कि हम इस बिल के पक्षधर हैं और हमारी पार्टी इसके सपोर्ट में बोल रही है। इस चीज़ के लिए हमारी पार्टी की नेता ने पहले ही यह बात बाहर भी रख दी है और हम यहां सदन में भी रख रहे हैं। जहां तक इस बिल का संबंध है, इसमें एक सवाल उठता है कि इन प्रावधानों की जरूरत क्यों पड़ी? एक प्रश्न उठ रहा है कि जब आज आईपीसी में रेप के खिलाफ पनिश्मेंट ऑलरेडी प्रोवाइडिड है तो इसकी क्या आवश्यकता है। इस पर गंभीरता से सोचने के बाद यह बात सामने आती है कि इसकी जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि जो प्रावधान पहले से थे, वे प्रावधान काफी नहीं थे, जिससे, जो दहशतगर्द लोग हैं, जो इस तरह की वहशी मानसिकता के लोग हैं, जो इस तरह के कार्य को करने के लिए आगे बढ़ते हैं, उनको कुछ ऐसे दंड दिए जाएं और उनके खिलाफ ऐसी प्रक्रिया अपनाई जाए कि वे इस तरह के कुकर्म करने के पहले दस बार सोचने का काम करें और ऐसे कुकर्म न करें।

महोदया, आज पूरे देश में रेप की घटनाएं बढ़ रही हैं, रेप ही नहीं गैंगरेप की घटनाएं बढ़ रही हैं। दिल्ली में जो गैंगरेप हुआ, उसके बाद केन्द्र की सरकार कुम्भकरण की नींद से जागी। अच्छा है, कम से कम वह इस संबंध में जागी तो सही। एक इन्सिडेंट यहां पर हुआ, जिसमें जनता बाहर निकली, उसने आवाज़ उठायी और इस तरह का एक बिल, जो कि आज से बहुत पहले आना चाहिए था, वह आज सामने आया है। इसके पहले अनेकों इस तरह के गैंगरेप्स, इस तरह के रेप्स हुए हैं। जहां से हमारे माननीय होम मिनिस्टर साहब आते हैं, महाराष्ट्र में भंडारा जिले में तीन नाबालिग लड़कियों को रेप करने के बाद मार करके कूंएं में डाल दिया गया, लेकिन आज तक वह मामला ऐसे ही पड़ा है। महोदया, केवल एक यही किस्सा नहीं है। इसके अलावा हमारे लखनऊ शहर में आशियाना नामक जगह पर सात वर्ष पहले गैंगरेप हुआ। उस गैंगरेप के होने के बाद सात वर्षों में भी आज तक वह मुकदमा शुरुआत की स्टेज में है और आगे नहीं बढ़ पाया है। इसका असर क्या होता है? लोगों को यह लगता है कि हम इस दुष्कर्म को करने के बाद आराम से घूम सकते हैं और दूसरी ओर, जिसके साथ रेप हुआ, अगर वह जीवित है, तब भी उसका जीवन समाप्त हो चुका होता है। जैसा कि मेरे पूर्व वक्ताओं ने भी इस बारे में कहा है । उन्होंने बिल्कुल सही कहा कि उनका घर में जीना, उन लड़कियों का, उनके घर-परिवार के लोगों का घर से बाहर निकलना दूभर हो जाता है और उनका जीना मरने के बराबर हो जाता है, लेकिन जिसने रेप किया है, वह खुलेआम सीना ठोककर घूमता है और अपनी बहादुरी दिखाने का, उसका बखान करने का काम करता है क्योंकि हम लोग, उसके खिलाफ जो सख्त से सख्त कार्यवाही होनी चाहिए, जो तुरंत कार्यवाही होनी चाहिए, वह नहीं करते हैं। इसलिए ऐसे व्यक्तियों पर, जो इस तरह के कार्य करते हैं, ऐसे लोगों के जो केसेज़ आते हैं, उनमें तुरंत कार्यवाही होनी चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि सालों-साल मुकदमा चलता रहे। आज आपने फास्ट ट्रैक कोर्ट की बात कही है। दिल्ली में फास्ट ट्रैक कोर्ट है। दो महीने में मुकदमे तय होने चाहिए, लेकिन जो दिल्ली का गैंगरेप हुआ, उसको भी आज साढ़े तीन महीने हो गए हैं, लेकिन अभी तक हम लोगों को यह नहीं मालूम कि कब यह मुकदमा तय होगा। इसी तरह से लखनऊ केस में सात वर्ष हो गए हैं, लेकिन वह गैंगरेप का केस अभी शुरुआती स्टेज पर ही है।

(1एक्स-जीएस पर जारी)

KGG-GS/1X/1.40

श्री सतीश चन्द्र मिश्रा (क्रमागत) : इस तरीके से एक नहीं, अनेकों केस हैं। पिछले एक वर्ष में लखनऊ को छोड़िए पूरे उत्तर प्रदेश को ही खाली हम ले लें, तो देश की बात अपने आप सामने आ जाएगी क्योंकि तीन हजार से ज्यादा रेप के केस हो चुके हैं, जो कि दर्ज हुए हैं और जो दर्ज नहीं होते हैं, उनका आंकड़ा अलग है। अब इस कानून में कम से कम एक प्रावधान आया है कि जो पुलिस अधिकारी केस दर्ज नहीं करेंगे, उनको सजा मिलेगी। यह बहुत जरूरी है। पुलिस रेप के केसों को दर्ज करने में हिचकिचाती है। वह कहती है कि नम्बर बढ़ जायेंगे और नम्बर बढ़ जायेंगे, तो हमारे ऊपर प्रेशर बढ़ जायेगा, हमको इस केस को खत्म करना पड़ेगा, इसलिए पुलिस केस दर्ज नहीं करती है। जब एक बार उनके ऊपर सजा का एक डंडा चल रहा होगा कि आप खुद सजा याफ्ता हो जायेंगे, तो वे केस दर्ज करने का काम करेंगे। जहां तक एफ.आई.आर. दर्ज न करने वाले के ऊपर एक सजा रखी गई है, इसका हम लोग समर्थन करते हैं। हमारी पार्टी का मानना है कि इसमें एक प्रावधान यह भी होना चाहिए कि जहां बड़े-बड़े लोग, जहां पहुंच के लोग, जहां मंत्री लोग होते हैं, मेम्बर ऑफ पार्लियामेंट हैं, एक्स मेम्बर ऑफ पार्लियामेंट हैं या एम.एल.. हैं, एम.एल.सी. हैं, अगर वे इस तरह की चीजों में आते हैं और जो अपने को पावरफुल कहते हैं, उनके खिलाफ कोई पुलिस वाला रिपोर्ट दर्ज नहीं करता है। ऐसे में suo motu कार्यवाही होनी चाहिए और suo motu की हैसियत से ऐसे मामलों में रिपोर्ट दर्ज होनी चाहिए। ऐसा नहीं है कि हम ऐसे ही बात कर रहे हैं। इस तरह के मामले हमारे सामने आये हैं। उत्तर प्रदेश के ही एक केबिनेट मंत्री ने भरी सभा में, एक लेडी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट थीं, उन्होंने उसके ऊपर भद्दा कमेंट किया। उन्होंने उसको ही नहीं, उसके पूर्व भी जो महिला जिलाधिकारी थीं, उसके बारे में भी कहा। उन्होंने शर्मनाक बातें प्रयोग कीं, जिनको हम शायद कह नहीं सकते हैं, उनकी physique के बारे में, उनकी खूबसूरती के बारे में पता नहीं क्या-क्या कमेंट किये। ऐसा पब्लिक मीटिंग में हुआ। इससे पहले कानपुर में भी एक केन्द्रीय मंत्री ने महिलाओं के बारे में एक हल्का सा कमेंट किया था, वह भी हमारे सामने आया था। इसी तरीके से एक्स मेम्बर ऑफ पार्लियामेंट हैं, उन्होंने ट्रेन में एक महिला साथी के साथ, जो कि उसी कूपे में चल रही थी या बगल के डिब्बे में थीं, उन्होंने उसके साथ बदतमीजी करने की कोशिश की और मामला रफा-दफा हो गया। ऐसे मामलों में पुलिस उनके खिलाफ कैसे एक्शन ले, किस तरीके से ले, इसलिए इसमें ऐसे लोगों को, जो इस तरह की घटनाएं होती हैं, इनके संबंध में भी suo motu कार्यवाही करने की जरूरत है।

उपसभाध्यक्ष (श्रीमती रेणुका चौधरी) : आप समाप्त करिए।

श्री सतीश चन्द्र मिश्रा : उपसभाध्यक्ष महोदया, मैं घड़ी देख रहा हूं। मुझे जितना वक्त मिला है, मैं उतने वक्त में अपनी बात समाप्त कर दूंगा। मुझे 10 मिनट का समय मिला है।

उपसभाध्यक्ष (श्रीमती रेणुका चौधरी) : नहीं, आपको 9 मिनट का समय दिया गया है।

श्री सतीश चन्द्र मिश्रा : उपसभाध्यक्ष महोदया, इसमें जो प्रॉविजन्स voyeurism के लिए, stalking के लिए, disrobing के लिए, acid attack के लिए लाए गए हैं, ये सब बहुत गंभीर हैं। आज हर व्यक्ति के घर में मां, बहन, बेटी और पत्नी है। सबको यह मालूम है कि जब वे घर से बाहर निकलती हैं, तो उनको कितनी तकलीफ होती है। अगर वे बाजार जाती हैं, स्कूल में पढ़ने जाती हैं, ट्रेन में चलती हैं, बस में चलती हैं, बस से उतरती हैं, तो उन्हें हर वक्त यह डर लगा रहता है कि उनका कौन पीछा कर रहा है और किस तरह बदतमीजी से बोल रहा है और यह भी किसी से छिपा नहीं है कि किस तरह के कमेंट्स उनके ऊपर किए जाते हैं। इससे लड़कियों को और महिलाओं को बहुत मानसिक पीड़ा होती है। इसलिए इसको बैन करना चाहिए और उनकी परेशानियों को हमें समझना चाहिए। हम लोग इस बात को इसलिए समझते हैं कि हम लोगों के यहां भी, हम लोगों के घर में भी मां, बहन, बेटियां सब हैं। इनके संबंध में जो कानून लाया गया है, इसके बारे में कुछ लोगों का यह कहना था कि यह कुछ ज्यादा हो गया है, यह excess है और ऐसा नहीं होना चाहिए। मैं मानता हूं कि इस तरह की जहां पर 10 हजार घटनाएं रोज होती हैं, शायद कोई एक एफ.आई.आर. दर्ज कराने के लिए जाता होगा, कोई हिम्मत ही नहीं करता है एफ.आई. आर. लिखवाने के लिए, क्योंकि वह महिला जानती है कि उसके साथ में ही बदतमीजी होगी, अगर वह पुलिस स्टेशन जाकर इस तरह की रिपोर्ट लिखाएगी। पूरे देश में दस हजार से अधिक इस तरह की घटनाएं रोजाना होती हैं और जिनकी रिपोर्ट नहीं होती है। इसलिए इस प्रावधान को लाना बहुत ही जरूरी था। इस प्रावधान को इस बिल में लाया गया है, इसलिए हम इसका स्वागत करते हैं।

(ASC/1Y पर जारी)

ASC-TDB/1.45/1Y

श्री सतीश चन्द्र मिश्रा (क्रमागत) : जहां तक फास्ट ट्रैक कोर्ट का सवाल है, मैं समझता हूं कि केवल दिल्ली शहर में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने से काम नहीं चलेगा, आपको फास्ट ट्रैक कोर्ट पूरे देश में बनानी पड़ेगी। ..(व्यवधान)..

THE VICE-CHAIRMAN (SHRIMATI RENUKA CHOWDHURY): Thank you, Shri Misra, for giving very good suggestions. The next speaker is Dr. T.N. Seema.

श्री सतीश चन्द्र मिश्रा : फास्ट ट्रैक कोर्ट आपने बनाई और जो आपने इसके लिए 2011 तक बजट दिया, उसको आपने खत्म कर दिया। महिला जजेज़ का अपॉइन्ट्मेंट बहुत जरूरी है। आज जब जजेज़ की वैकन्सीज खाली पड़ी हुई हैं तो फिर आप फास्ट ट्रैक कोर्ट्स बनाकर, उनमें किनको बैठाएंगे? आज हाई कोर्ट्स और लोअर कोर्ट्स में लाखों की संख्या में रेप, बलात्कार से संबंधित जो केसेज़ चल रहे हैं, वे पेंडिंग हैं। वे इसलिए पेंडिंग हैं, क्योंकि वहां पर जजेज़ नहीं हैं अगर कहीं कोर्ट है तो जज नहीं हैं। आपको इन चीजों को भी एक साथ लेकर चलना पड़ेगा। अगर आप जजेज़ अपॉइन्ट नहीं करेंगे, जो एग्जिस्टिंग स्ट्रेंथ है, उसको फिल नहीं करेंगे,तो आप न्याय नहीं दे पाएंगे। इसलिए मैं दोबारा यह कहते हुए अपनी बात समाप्त करना चाहूंगा कि इस तरह के इंन्सिडेंट्स को रोकने के लिए यह जरुरी है कि हम सबके मन में भी एक डर पैदा हो। वह डर यह हो कि इस तरह की हरकत करने के बारे में अगर हम सोचेंगे भी तो एक बहुत सख्त सज़ा मिलेगी। इसी के साथ मैं इस बिल का समर्थन करता हूं और अपनी बात समाप्त करता हूं।

(समाप्त)



THE VICE-CHAIRMAN (SHRIMATI RENUKA CHOWDHURY): Thank you. The next speaker is Dr. T.N. Seema.



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