Ds-kls/11. 00/1a The House met at eleven of the clock, mr. Chairman in the Chair



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Uncorrected/ Not for Publication-03.05.2012


DS-KLS/11.00/1a

The House met at eleven of the clock,

MR. CHAIRMAN in the Chair.



प्रश्न संख्या 381



श्रीमती कुसुम राय: माननीय सभापति जी, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सत्ताधारी दल के आन्ध्र प्रदेश के सांसद की कम्पनी, Progressive Construction Ltd. और PCL-MVR Joint Venture, जो विश्व बैंक के अनुसार तीन राष्ट्रीय मार्गों के निर्माण की अनियमितता में संलिप्त है, उसे NHAI ने blacklist भी किया था, परन्तु बाद में उसे काली सूची से निकाल दिया गया। मैं सरकार से यह जानना चाहूँगी कि किसने और किस आधार पर blacklisted company को blacklist से निकाल कर विश्व बैंक द्वारा funded इन तीन राजमार्ग परियोजनाओं के ठेके आवंटित किये और सरकार ने NHAI के दोषी लोगों एवं कथित कम्पनी के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की है?

श्री सी.पी. जोशी: सभापति महोदय, जो बात माननीय सदस्या ने कही, वह सही नहीं है। विभाग ने 2008 में गाइडलाइंस दीं, जिनमें कुछ कम्पनियों को ‘non- performance’ declare किया गया है। Non-performance declare करने का मतलब उनको blacklisted करना नहीं है। वे कम्पनियाँ बाद में जब ठीक ढंग से काम करती हैं, तो वापस उन्हें ‘performance’ की category में रखते हैं। 2008 में PCL, MVR, लेनको, मधुकॉन प्रोजेक्ट्स तथा रानी कंस्ट्रक्शंस आदि

Q.No. 381 (contd.)

कम्पनियों को non-performance declare किया गया। जब बाद में वे दूसरे काम समय पर करती रहीं, तब उन्होंने 2010 में अपने आप यह कहा कि हमें non-performance से performance की category में लिया जाए। उनके काम की प्रोग्रेस को देखते हुए उन्हें non-performance category से performance category में लिया गया और इसलिए 2010 में इनको इस category में काम दिया गया, उसमें blacklist करने की कोई बात नहीं है। Non-performance का मतलब है कि विभाग उनको दूसरा bid करने के लिए debar करता है और blacklist करने का मतलब है कि अन्य किसी विभाग में वे काम नहीं कर सकते। यह विभाग का internal मामला है। उनकी कार्यप्रणाली को ठीक ढंग से लागू करने के लिए विभाग ने ये गाइडलाइंस लागू की थीं, इसलिए उनको 2008 में non-performance declare किया गया और 2010 में जब उनकी प्रोग्रेस satisfactory थी, तब उनको performance category में लिया गया।

श्री सभापति: थैंक्यू। दूसरा प्रश्न।

श्रीमती कुसुम राय: माननीय सभापति जी, मेरे प्रश्न का यह सही जवाब नहीं है। वैसे, जब बड़े-बड़े घोटालों का जवाब नहीं मिल पाया है, तो यह तो छोटा घोटाला है। ..(व्यवधान)..

MR. CHAIRMAN: Silence please. ...(Interruptions)..
Q.No. 381 (contd.)

श्रीमती कुसुम राय: फिर भी मैं आपके द्वारा मंत्री जी को यह बताना चाहती हूँ कि विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, कम्पनी द्वारा NHAI के अधिकारियों को करीब दो करोड़ रुपये रिश्वत के रूप में दिए गए और NHAI के अफसरों के लिए होटल बुकिंग और उपहार पर करीब 9.88 लाख खर्च किए गए। यह बहुत ही गम्भीर मामला है। क्या सरकार इस मामले की जाँच सीबीआई या जेपीसी से कराएगी, ताकि दोषी लोगों को सज़ा मिल सके, क्योंकि कथित रूप से सत्ताधारी दल के सांसद की कम्पनी के खिलाफ बिना निष्पक्ष जाँच के सच्चाई सामने नहीं आने वाली है? यदि इसकी जाँच जेपीसी और सीबीआई से करानी है...

श्री सभापति: आप सवाल पूछिए न।

श्रीमती कुसुम राय: यह सवाल ही है, सर। ..(व्यवधान).. मैंने सवाल ही पूछा है, सर। ..(व्यवधान)..

श्री नरेश अग्रवाल: सर, यह बहुत ही गम्भीर मामला है। ..(व्यवधान).. माननीय सदस्या इस पर कुछ पूछ रही हैं..(व्यवधान)..

श्री सभापति: आप उनको ज़रा बोलने दीजिए न। ..(व्यवधान)..

एक माननीय सदस्य: सर, इसकी जाँच आपसे करवा लें, हमें कोई आपत्ति नहीं है।..(व्यवधान)..

Q.No. 381 (contd.)

श्रीमती कुसुम राय: सर, आप इसकी जाँच करवा लें।..(व्यवधान).. मंत्री जी अगर जेपीसी और सीबीआई से इसकी जाँच कराएँगे, तो उसके ब्योरे की जानकारी हमको दें।

श्री सी.पी. जोशी: माननीय सभापति महोदय, 1 मार्च, 2012 को वर्ल्ड बैंक के रिजनल टीम लीडर, Integrity Vice President ने DA को एक पत्र लिखा। DA के पत्र का content था, 'sharing of investigative findings in relation to the World Bank financed Lucknow-Muzaffarnagar National Highway Project'. उसमें उन्होंने बताया है कि PCL और PCL-MVR JV कम्पनी हैं, जिन्होंने fraudulent practices को adopt किया है, जिसमें इनको sanctionable practices की category में रखा जा सकता है।

(1बी/एमसीएम पर जारी)

-DS/MCM-USY/1B/11-05

श्री सी0पी0 जोशी (क्रमागत) : जिसमें इनको सैंक्शनेबल प्रेक्टिसिज की केटेगरी में रखा जा सकता है। यह पत्र मंत्रालय को 19 मार्च को मिला। जैसे ही पत्र मिला, मंत्रालय ने इसके सम्बन्ध में जांच करने के लिए एक कमेटी बना दी। मंत्रालय ने डी00 को जो पत्र भेजा है, मैं उसका contents बतलाना चाहता हूं। "It is requested that the Ministry of Road Transport and Highways examine the attached letter and the material in the appendix to the

Q.No. 381 (contd.)

letter and take appropriate action in the matter, including getting the matter investigated by an appropriate investigative agency. " विभाग ने उस पत्र के आधार पर एक कमेटी बनाई। विभाग के जो ए0एस0एफ0 हैं, उनको उसका चेयर पर्सन बनाया। यह उसकी जांच कर रहे हैं। जांच करने के बाद उस पर जो भी कार्यवाही करनी है, उस कार्यवाही के बारे में हम डी00 को सूचित करेंगे। परन्तु यह कहना कि किसी सांसद को बचाया जा रहा है, यह उचित नहीं है। इसी पत्र के अन्तर्गत वे जो दो कम्पनियां हैं, वर्ल्ड बैंक ने उन दो कम्पनियों को 15 मार्च, 2012 को नोटिस दिया है कि आपने जो यह fraudulent practice की है, तो क्यों नहीं आपके खिलाफ कार्रवाई की जाए? यह कम्पनी अभी पत्र वर्ल्ड बैंक को देगी, उसके बाद वर्ल्ड बैंक उसको आइडेंटिफाइ करेगा कि यह उस पर कल्प्रिट है या नहीं है। आज suo motu किसी को कलप्रिट करना चाहते हैं, यह ठीक परम्परा नहीं है।



श्रीमती कुसुम राय : सर, ऐसे छोटे-छोटे मामलों की भी क्या सी0बी0आई0 जांच करेगी?

श्री शिवानन्द तिवारी : सभापति महोदय, वर्ल्ड बैंक के हवाले से अखबारों में बिल्कुल साफ-साफ खबर छपी थी कि जो मुख्यालय है,नेशनल हाईवे आथॉरिटी का या माननीय मंत्री जी के विभाग का, वह एक खास कांट्रेक्टर को मदद कर रहा है, जो कांट्रेक्टर सब-स्टेंडर्ड काम कर रहा है और काम में डिले भी कर रहा

Q.No. 381 (contd.)

है। यह स्पेसिफिक खबर अखबारों में छपी थी। मैं माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि जब मंत्रालय के मुख्यालय पर ही यह आरोप लगाया जा रहा है कि उसके संरक्षण में खराब ठेकेदार को बार-बार काम दिया जा रहा है, तो मुख्यालय के अफसरों की कमेटी बनाकर आप कैसे जिम्मेदारी के साथ जांच के नतीजे की उम्मीद कर सकते हैं? इसलिए मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि क्या उन आरोपों की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से, जैसे सी0बी0आई0 वगैरह से कराने के बारे में इनकी मंशा है?

श्री सी0पी0 जोशी : माननीय सभापति महोदय, सरकार को सी0बी0आई0 से जांच कराने में कोई तकलीफ नहीं है। लेकिन जो प्रोसीजर है उसको समझना पड़ेगा। इसमें टेंडरिंग हुआ है, टेंडरिंग में बिडिंग हुई है और बिडिंग होने के बाद इसको काम मिला है और यह काम समाप्त भी हो गया है। लेकिन वर्ल्ड बैंक की टीम ने जो आधार बनाया है, इसमें इन्होंने fraudulent practice की बात कही है। fraudulent practice का मतलब जब हम किसी को टेंडर देते हैं तो दो तरह के एडवांस होते हैं, एक एडवांस होता है मोबाइलाइजेशन एडवांस और दूसरा होता है मेटीरियल एडवांस। मोबाइलाइजेशन एडवांस में जब उसको काम एवार्ड करते हैं तब वह 5 परसेंट टी0पी0सी0 का पैसा एडवांस ले सकता है। उसके बाद 10 परसेंट प्रोग्रेस करने के बाद 5 परसेंट पैसा और ले सकता है। यह जो मोबलाइजेशन एडवांस इस कंपनी ने लिया है, उसके सम्बंध में वर्ल्ड बैंक ने

Q.No. 381 (contd.)

इनके द्वारा की गयी प्रैक्टिसेस के बारे में कहा है कि एक जगह के काम की जगह दूसरी जगह के काम की इनवॉयसेस को लेकर, आपने पैसा विद्ड्रा कर लिया, यह fraudulent practice है। इस के सम्बंध में वर्ल्ड बैंक ने उस कम्पनी को लिखकर दिया है कि क्यों नहीं इसको मिस-कंडक्ट मानकर आपके खिलाफ कार्रवाई करें। जब तक वर्ल्ड बैंक इस नतीजे पर नहीं पहुंचेगा, तब तक मंत्रालय यह काम नहीं कर सकता। लेकिन मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि इस संबंध में मंत्रालय ने जो टीम बनाई है, वह इस बात पर आश्वस्त हो जाएगी कि वर्ल्ड बैंक की टीम ने यह जो fraudulent practice और corrupt practice के बारे में कहा है, यदि यह सत्य है तो जिस एजेंसी से चाहेंगे उस एजेंसी से हम जांच करा लेंगे। हमें इसको किसी से छिपाने की आवश्यकता नहीं है।

SHRI PRAVEEN RASHTRAPAL: Sir, in annexure 'A' to the answer, the hon. Minister has given complete details regarding loan being taken from the World Bank. This amounts to a total of 2471 US dollars for construction of national highways project, all over the country. Last week, the hon. Minister has been to Gujarat for inauguration of such a road and an over-bridge over a river. Naturally, he gave details of the money being paid by the Central Government and other agencies for the construction of the road. You will appreciate that

Q.No. 381 (contd.)

there is a Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana. The name itself indicates that for that rural road money will be paid by the Central Government. There are State Highways; there are National Highways.



MR. CHAIRMAN: Question please.

SHRI PRAVEEN RASHTRAPAL: I am coming to the question, Sir.

But, we have got a Chief Minister in Gujarat, who, every second day, criticizes the....(Interruptions)



MR. CHAIRMAN: No; no. That is not a question. (Interruptions) No; no. That's not a question. (Interruptions)

SHRI PRAVEEN RASHTRAPAL: Sir, I am coming to the question. I want...(Interruptions) Sit down. (Interruptions) Sit down. मैं बोलता हूं, बैठ जाओ, बैठ जाओ.... (Interruptions) बैठ जाओ. You can't stop me. (Interruptions) You can't stop me. (Interruptions) Sir, they can't stop me. (Interruptions) They must allow me to put my question. (Interruptions)

(Followed by 1c – PB)
Q.No. 381 (contd.)

-USY/PB-HMS/1c/11.10

MR. CHAIRMAN: That’s not a question. ...(Interruptions)...

SHRI PRAVEEN RASHTRAPAL: Allow me to put a question. ...(Interruptions)... Allow me to put a question. ...(Interruptions)...

MR. CHAIRMAN: Just one minute. ...(Interruptions)...Just one minute. ...(Interruptions)... One minute, please. ...(Interruptions)... Mr. Rashtrapal, please sit down. ...(Interruptions)... You have been given the privilege of asking a supplementary question, not making a statement. So, please ask a question. ...(Interruptions)...

SHRI PRAVEEN RASHTRAPAL: All others were making statements, Sir.

MR. CHAIRMAN: No. ...(Interruptions)..

SHRI PRAVEEN RASHTRAPAL: Let me put the question. ...(Interruptions)... Let me put the question. ...(Interruptions)...

SHRI ARUN JAITLEY: Sir, I have a point of order.

MR. CHAIRMAN: In Question Hour? ...(Interruptions)...

Q.No. 381 (contd.)

SHRI ARUN JAITLEY: Sir, I will straightway come to the point of order. My point of order is: can the conduct of Chief Ministers be discussed in this House?

MR. CHAIRMAN: No. ...(Interruptions)...

SHRI PRAVEEN RASHTRAPAL: Yes, we can. You have discussed the Governors’ conduct. ...(Interruptions)...

MR. CHAIRMAN: No, no. ...(Interruptions)... The question needs to be reframed.

SHRI PRAVEEN RASHTRAPAL: Sir, the Governors’ conduct was discussed here. ...(Interruptions)...

MR. CHAIRMAN: All right; I will go to the next question. ...(Interruptions)...

SHRI PRAVEEN RASHTRAPAL: No, Sir. Let me put my question.

MR. CHAIRMAN: So, please put your question.

SHRI PRAVEEN RASHTRAPAL: Sir, I want to know from the hon. Minister how much fund was given by the Central Government to the State of Gujarat during the last three years for construction of roads. ...(Interruptions)...
Q.No. 381 (contd.)

SHRI C.P. JOSHI: Sir, this question does not come under the purview of the main question.

MR. CHAIRMAN: All right. Fine. Shri P. Rajeeve. ...(Interruptions)...

SHRI BALBIR PUNJ: Mr. Chairman, Sir, reference to Gujarat should be expunged. ...(Interruptions)...

MR. CHAIRMAN: We will look into the records and take appropriate action.

SHRI P. RAJEEVE: Sir, actually, the answer given by the Minister is partly correct. The Minister has stated that these two Companies are only non-performers and after they have improved their performance, they have been given the contracts again. Sir, the Report prepared by the World Bank’s Institutional Integrity Unit has listed ‘fraudulent and corrupt practices’ by private Indian contractors, ‘Progressive Construction Limited and MVR JV.’ The words used in the World Bank report are ‘fraudulent and corrupt practices’. Now, the Government has stated that their performance has improved. Through you, Sir, I want to know from the hon. Minister what is this

Q.No. 381 (contd.)

‘improved performance’, i.e., improvement in bribery amount! What action has been taken by the Minister on the Report and has any inquiry been conducted by the Ministry on the Report of the World Bank with regard to these two Companies on ‘fraudulent and corrupt practices’?



SHRI C.P. JOSHI: Sir, the question is not relevant to the main question to an extent because the work award was given between 2005 and 2008. They have brought this fact just know. Let us ascertain the facts and, then, we can say whether they have entered into corrupt practices during that time or not. So, we are saying very categorically that ... ...(Interruptions)...

MR. CHAIRMAN: Please, please. ...(Interruptions)...

SHRI C.P. JOSHI: Sir, they have brought it to our notice on 1st March, 2012. They have already given notice to these Companies. Let the facts be ascertained by the World Bank team. Once they ascertain it, then we will take action on it. But I would like to remind the hon. Member that the non-performance is not linked with this. That is a
Q.No. 381 (contd.)

different project. So, don’t link these two things together. ...(Interruptions)...



MR. CHAIRMAN: No supplementaries, please.

SHRI C.P. JOSHI: These companies are having a number of projects in the NHAI. So, don’t mix the two things together.

MR. CHAIRMAN: Question No. 382. ...(Interruptions)... No, no, please. This is over. ...(Interruptions)...

श्री नरेश अग्रवाल : सर, यह प्रश्न यू0पी0 से जुड़ा है। एक प्रश्न पूछने दीजिए।

श्री सभापति : नरेश जी, बैठ जाइए। अब नहीं हो सकता है।

Q.No. 382

SHRI A. ELAVARASAN: Sir, I want to know whether the Radar Imaging Satellite circles the earth 14 times a day and takes clear pictures of the earth surface, and whether these pictures can be used for many purposes such as crop prediction, the national security, etc.

SHRI V. NARAYANASAMY: Sir, I would like to submit that the hon. Member put this question before the Satellite was launched on the 26th of April, 2012. Sir, with your kind permission, I made, in this august House, a statement regarding the successful launch of RISAT-I by our scientists. I would like to mention that this is a hundred per cent indigenously-built Satellite.

(Contd. by 1d/SKC)

1d/11.15/skc

SHRI V. NARAYANASAMY (CONTD.): It was put into the orbit. And, according to them, after the first manoeuvering, it started sending images. Sir, the hon. Member has asked the number of circles it completes in a day. It is a 24/7 satellite, covering the Earth six times a day, and taking 130 minutes for one round. It clicks ten minutes’ images continuously, from 6:00 a.m. to 6:00 p.m. in the evening.

Q. No. 382 (contd.)
Sir, I would like to share with this august House that when the first pictures were taken at 6:00 a.m. on 1st May, 2012, the images were very clear and it covered areas starting from the Himalayan glaciers to Karnataka via Bhopal. It took images in a radius of 25 km. It used a new technology. From optical remote sensing satellite technology, we had moved on to micro-wave remote sensing technology; and, now, we have moved on to adopting the latest technology, that is, the remote imagery satellite technology. Sir, scientists from ISRO deserve congratulations from this august House for the successful launch of such a large and indigenously-built satellite.

MR. CHAIRMAN: The House has already done that. Thank you.

SHRI A. ELAVARASAN: Sir, has India’s rank in the world improved in satellite-launching technology after successfully launching this satellite as well as Agni-V? What steps have been taken to strengthen the satellite-launching infrastructure?
Q.No. 382 (contd.)

SHRI V. NARAYANASAMY: Sir, as far as Agni-V is concerned, it is being dealt with by the DRDO. So, I would not like to answer that question. But as far as satellite-launching technology is concerned, we are one of the leading countries along with the United States, Europe, China and Russia in this field. We are collaborating with various countries, especially Russia, in the field of improving our technologies in remote sensing, in launching satellites for transponder-use and in various other applications. Our scientists are second to none in the world and they have bought many laurels to our country. They have developed and used advanced technologies; they have done inventions. Sir, I feel very proud of our scientific community.

(Ends)



Q. No. 383

SHRI PYARIMOHAN MOHAPATRA: Sir, first of all, I would like to draw the attention of the Chair to the violation of the guidelines given by the Chair in this House the other day about writing the name ‘Odisha’ properly. This Department in this Question and in Question No. 387, has mentioned ‘Orissa’, which is no longer the name of the State. So, I suggest that this may kindly be taken up again.

MR. CHAIRMAN: Thank you for pointing that out.

SHRI PYARIMOHAN MOHAPATRA: Sir, my first supplementary is, the Ministry or the Minister does not seem to be serious about the biggest crime against womanhood, that is, dowry. It should be considered as being worse than AIDS, because it breeds not only corruption, but even violence, which sometimes goes up to bride- burning in several cases. I had asked whether awareness would be spread about it, but there is no awareness in the Ministry itself. In the reply, it has been stated that there is no monitoring mechanism. This is a Central Act passed by Parliament and monitoring of the implementation of this law is the duty of the Government. When will
Q. No. 383 (contd.)

the Government recognize its duties and start monitoring it? In the reply, there is no mention about any scheme for monitoring.



(fd. at 1e/hk)

HK-NB/1e/11.20

श्रीमती कृष्णा तीरथ : सभापति जी, माननीय सदस्य का प्रश्न मैंने देखा है, इन्होंने अधिनियम के प्रवर्तन पर निगरानी रखने के बारे में पूछा है। यह राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता है और हमने जो मॉडल रूल्स बनाए हैं, जैसे Central Dowry Prohibition Act, 1961 compatible with the model Rules circulated by the Government of India, उसके आधार पर राज्यों ने अपने यहां Dowry Prohibition Officers and Chief Dowry Prohibition Officer बनाए हैं। इन Dowry Prohibition Officers का काम बहुत अहम है। इन DPOs के बहुत से काम हैं, जैसे complaint receive करना, उस पर action लेना, complaints को register करना, उनको maintain करना। इसके अतिरिक्त हमारे Dowry Prohibition Officers, Advisory Board के Convener भी हैं और वे Advisory Board के Members के साथ regular contact में रहते हैं। इसके अलावा District Magistrate को इस बारे में inform करना कि कहां-कहां इस तरह के केसेज़ आए हैं, इस ऐक्ट का use हो रहा है या नहीं हो रहा है, वह लिस्ट जो bride और bridegroom ने तैयार की है, उसे अपनी कस्टडी में

Q. No. 383 (contd.)

रखना, अनेकों इस तरह के काम हैं। मैं मानती हूं कि यह बहुत बड़ी सामाजिक बुराई है और इस बुराई को दूर करने के लिए बहुत से उपाय हैं। इसमें सबसे बड़ी बुराई है dowry. Dowry जो demand basis पर है, उसे हम prohibit करना चाहते हैं। दूसरा है स्त्रीधन, स्त्रीधन पर prohibition नहीं है और तीसरा है गिफ्ट, ये तीन तरह की चीजें हैं। Dowry को समाप्त करने के लिए CDPO का प्रावधान है और यह राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है। CDPO जो complaint लेता है, उसकी scrutiny की जाती है और अगर complaint section 3, section 4 या अगर section 4(A) के अंतर्गत है, तो उसकी enquiry conduct करके, parties से evidences इकट्ठे किए जाते हैं और उसके बाद ये evidences DPOs द्वारा CDPO को दिए जाते हैं। शिकायत करने वाली पार्टी तथा जिसके खिलाफ शिकायत है, उसको नोटिस देना, समय देना कि उनकी hearing कब करनी है, शिकायत मिलने के एक महीने के अंदर उस पर कार्यवाही करना, यह सारी जिम्मेदारी राज्य सरकारों की बनती है और जहां तक Central Monitoring Committee का सवाल है, वह अभी नहीं है। हमारा National Women Mission इस बारे में awareness create करता है, सोसायटीज़ awareness create करती हैं, NGOs awareness create करती हैं और District Probation Officer या Additional District Probation Officer या City Probation Officer का ध्यान अगर इस ओर नहीं होता है, तो वे इस

Q. No. 383 (contd.)

ओर उनका ध्यान दिलाते हैं। इसके अलावा सरकारी कर्मचारी को शादी के बाद एक declaration देना पड़ता है कि उसने दहेज़ नहीं लिया है, उस पर उसके signature होते हैं, उसके father के signature होते हैं, उसकी wife and father-in-law के भी signature होते हैं।


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